Yoga Day:योग पर काम कर गया प्रधानमंत्री मोदी का ‘आइडिया’, पढ़ें भारतीय योग शिक्षकों पर डॉलर बरसने की कहानी

Yoga Day: PM Modi idea on yoga worked, read the tale of earning dollars by Indian yoga teachers

Yoga Day: Sadanand, International Foundation of Yoga Professional
– फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह आइडिया, जिसके तहत साल 2015 में ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ की शुरुआत हुई, काम कर गया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ का विचार सदस्य राष्ट्रों के सामने रखा था। इसके बाद 11 दिसंबर, 2014 को यूएन के 193 सदस्य देश, 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आयोजित करने पर सहमत हुए। 21 जून, 2015 को जब पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया, तो उसके बाद दुनिया के विभिन्न देशों में भारतीय योग शिक्षकों की मांग बढ़ने लगी। अमेरिका, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, जापान, अफ्रीका, हंगरी, बुल्गारिया और स्पेन सहित अनेक देशों में आज बड़ी तादाद में लोग योग सीख रहे हैं। भारतीय योग शिक्षकों पर डॉलर बरसने लगा है। हर साल सैंकड़ों भारतीय योग शिक्षक, किसी न किसी देश में पहुंच रहे हैं।

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कुछ इस तरह हुई अंतरराष्ट्रीय संगठन की शुरुआत

यूपी के ओरैया जिले में स्थित गेल में कार्यरत सदानंद, जिन्होंने इंटरनेशनल फाउंडेशन ऑफ योगा प्रोफेशनल्स (आईएफवाईपी) जैसे बड़े संगठन को खड़ा करने में अहम योगदान दिया है, वे बताते हैं, आज योग एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है। ‘योग से बरस रहे डॉलर’ की बाबत सदानंद कहते हैं, ये एक बड़े संघर्ष की कहानी है। 2003 की बात है, जब उनकी मां को गठिया ने जकड़ लिया था। डॉक्टर, वैद्य और योगचार्यों से संपर्क किया गया। पतंजलि योगपीठ जैसे बड़े संगठनों के यहां भी गए। मां को आराम भी मिला, लेकिन उनकी पीड़ा मेरे लिए एक प्रेरणा का काम कर गई। इसके बाद सदानंद ने देश में योग की थोड़ी बहुत जानकारी रखने वालों को एकत्रित करना शुरू कर दिया। छोटी-छोटी वर्कशॉप आयोजित की गई। विभिन्न संस्थानों से संपर्क किया गया। इस तरह योग सिखाने एक प्लेटफार्म तैयार हुआ। शुरुआत में आर्थिक दिक्कतें भी बहुत आईं। चार साल पहले तक दिल्ली में स्थायी दफ्तर तक नहीं ले सके थे। एक योगाचार्य ने नजफगढ़ में एक कमरा हमे दिला दिया था। वह दफ्तर बाहरी दिल्ली में था, इसलिए उसका ज्यादा इस्तेमाल नहीं हो सका। जब कोई बैठक, वर्कशॉप या सम्मेलन होता है, तो गांधी पीस फाउंडेशन का हॉल किराए पर ले लेते थे। सात-आठ वर्ष पहले ऐसी ही एक जगह पर इंटरनेशनल फाउंडेशन ऑफ योग प्रोफेशनल (आईएफवाईपी) की स्थापना की गई।

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